हास परिहास
Wednesday, September 3, 2008
नेत्रदान
नेत्रदान के पक्ष में थे डॉक्टर 'राजदान',
हाथ
जोड़
हमने
कहा
- '
क्षमा
करें
श्रीमान
' .
क्षमा
करें
श्रीमान ,
लगाकर
आँख
हमारी
सूरदास
ने
किसी
सुघड़
नारी
पर
मारी
.
तो
बतलाओ
उस
अंधे
का
,
क्या
बिगडेगा
आँख
हमारी
,
हमको
ही
,
तो
पाप
लगेगा
.
काका
हाथरसी
--
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