कभी नाक को, कभी कान कोमलते इब्नबतूताइसी बीच में निकल पड़ाउनके पैरों का जूता
उड़ते उड़ते जूता उनकाजा पहुँचा जापान मेंइब्नबतूता खड़े रह गयेमोची की दुकान में।
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भगवतीचरण वर्मा
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